
पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा समय से संघर्ष जारी है। ऐसे में अब ईरान के खिलाफ इस्राइल की नई रणनीति ने और बड़ी चिंताओं को जन्म दे दिया है। सवाल यह है कि ईरान युद्ध में अब नेतन्याहू क्या कुछ बड़ा सोच रहे? क्षेत्रिय देशों के साथ नए गठबंधन बनाने की बात उन्होंने क्यों कही? यह ईरान के लिए कैसे और कितना खतरनाक हो सकता है?पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि ईरान से युद्ध में अब इस्राइल कौन सी नई योजना बना रहा है और यह कितना असरदार होगा?अपने संबोधन में इस्राइली पीएम नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल धीरे-धीरे नए क्षेत्रीय गठबंधनों का निर्माण कर रहा है, ताकि ईरान के खतरे से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि इस्राइल क्षेत्र के महत्वपूर्ण देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है और इसे उन्होंने ईरानी खतरे का सामना करने के लिए जरूरी बताया। एक महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष के बीच इस्राइल का यह कदम इस क्षेत्र में बदलते राजनीतिक परिदृश्य और संघर्ष के बीच व्यापक सहयोग की ओर इशारा करता है।हालांकि अपने बयान में इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी तक यह नहीं बताया कि ये कौन से देश हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही मैं इन महत्वपूर्ण समझौतों के बारे में और जानकारी साझा कर सकूंगा। ऐसे समय में इस्राइली प्रधानमंत्री का यह बयान यह संकेत देता है कि इस्राइल और अरब देशों के कुछ हिस्सों के बीच सहयोग बढ़ रहा है।इस्राइली पीएम का कहना है कि इस साझेदारी का उद्देश्य ईरान की सैन्य और परमाणु योजनाओं के खिलाफ एकजुट होना है। नेतन्याहू ने आगे कहा कि इस्राइल ने हाल ही में बड़ी युद्धभूमि सफलता हासिल की है और दो बड़े खतरों, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को पीछे धकेल दिया है। उनका यह कदम व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिससे क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और प्रभुत्व को मजबूत किया जा सके।




