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एक वीडियो और ममता बनर्जी को चैलेंज करने वाले हुमायूं कबीर का गेम ओवर, किसने किया वोटिंग से पहले खेला

एक वीडियो और ममता बनर्जी को चैलेंज करने वाले हुमायूं कबीर का गेम ओवर, किसने किया वोटिंग से पहले खेला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तगड़ा टि्वस्ट सामने आया है। एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की अगुवाई वाली वाली पार्टी से गठबंधन तोड़ लिया है। ओवैसी की पार्टी ने यह बड़ा फैसला हुमायूं कबीर के वायरल वीडियो के बाद उठाया है। जिसमें वह बीजेपी से 1000 करोड़ मिलने की बात कह रहे हैं। इस पूरे मामले ने राजनीति को गरमा दिया है। बीजेपी ने इस खुलासे को नकार दिया है।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में चौथी बार जीत के लिए लड़ रहीं ममता बनर्जी के सामने आई एसआईआर और हुमायूं कबीर की बगावत को बड़ा खतरा माना जा रहा था लेकिन नामांकन प्रक्रिया के बीच ही हुमायूं कबीर के कथित वीडियाे सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा टि्वस्ट आया है। असुदद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली एआईएमआईएम ने गठबंधन तोड़ लिया है। बंगाल में मुस्लिमों की ताकत पर ममता बनर्जी को घेरने निकले हुमायूं कबीर को लेकर अब अल्पसंख्यक समुदाय में अविश्वास की स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे में हुमायूं कबीर की हालत चौबे बनने निकले दुबे जैसी हो गई है, तो वहीं इस पूरे प्रकरण से टीएमसी को फायदा हो सकता है, क्योंकि हुमायूं कबीर की सभाओं में भीड़ ने टीएमसी को बेचैन कर दिया था।हुमायूं कबीर के कथित वीडियो के वायरल होने के बाद एआईएमआईएम ने अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में सवाल यह है कि पार्टी कितनी सीटों पर लड़ पाएगी? क्योंकि पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। दूसर चरण के लिए भी नामांकन की समय सीमा खत्म हो चुकी है। पहले चरण के 52 सीटों के लिए कुल 1,586 उम्‍मीदवारों ने 2304 नामांकन पत्र भरे। इन निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान 23 अप्रैल को होगा। एआईएमआईएम ने ट्वीट किया है कि हुमायूं कबीर के खुलासों से यह साफ हो गया है कि बंगाल के मुसलमान कितने कमजोर हैं। पार्टी ने कहा कि मजलिस ऐसे किसी भी बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती, जिससे मुसलमानों की ईमानदारी पर सवाल उठे। एआईएमआईएम ने आज से कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है।असुदद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने अपने बयान में कहा है कि बंगाल के मुसलमान सबसे गरीब, उपेक्षित और शोषित समुदायों में से एक हैं। दशकों तक धर्मनिरपेक्ष शासन रहने के बावजूद, उनके लिए कुछ भी नहीं किया गया है। किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने के पीछे AIMIM की नीति यह है कि हाशिए पर पड़े समुदायों की अपनी एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज हो। हम बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे और आगे किसी भी पार्टी के साथ हमारा कोई गठबंधन नहीं होगा। बीच चुनाव में एआईएमआईएम द्वारा हुमायूं कबीर का हाथ छोड़ने से उनकी छवि को झटका लगा है। ऐसे में अब मुस्लिम कैसे यकीन करेंगे कि हुमायूं कबीर के साथ उनके हित सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि टीएमसी पहले से ही हुमायूं कबीर को बीजेपी की ‘बी’ टीम बता रही है।

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