आंखों में आंसू लिए कुवैत से बेटे के शव के आने का इंतजार कर रहे बुजुर्ग दंपति,पत्नी बेसुध
✍️आर.एस.तिवारी
आंखों में आंसू लिए कुवैत से बेटे के शव के आने का इंतजार कर रहे बुजुर्ग दंपति,पत्नी बेसुध
मोहनलालगंज। रोजगार की तलाश में कुवैत गए भदेसुवा के इल्तियाक अली (28) की 13 अप्रैल को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। मौत के बाद से उसके घर में मातम पसरा है। मौत के छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उसका शव घर नहीं पहुंच सका है। वृद्ध मां-बाप अपने बेटे के अंतिम दर्शन के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन कंपनी की ओर से अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही है।ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मोनू यादव ने बताया कि 28 वर्षीय युवक इल्तियाक अली 2017 से कुवैत में रहकर एक कंपनी में एसी मकैनिक का काम करता था। बीते 24 नवम्बर को उसकी शादी थी शादी में घर आया था। इसके बाद 20 जनवरी को वापस कुवैत चला गया था। युवक के पिता मुश्ताक अली ने बताया कि 13 तारीख को उनकी बहू आफरीन बानों (मृतक की पत्नी) दवा लेने उन्नाव गई थी। दोपहर लगभग तीन बजे उनके बेटे ने बहू को कॉल किया। घर आकर जब वापस पति को कॉल किया तो रिसीव नहीं हुई। थोड़ी देर बाद मोबाइल फोन स्वीच ऑफ हो गया। मुश्ताक अली ने बताया शाम छह बजे गांव के कुछ लोगों ने बताया कि उनके बेटे की मौत हो गई है। सूचना देने वालों के परिवार के लोग भी कुवैत में रहते हैं। इसके बाद बेटे के साथियों से सम्पर्क किया तो उन लोगों ने बताया कि नहाने बाथरूम में गया था। काफी देर तक नहीं निकला तो वहां की पुलिस ने दरवाजा तोड़ कर बाहर निकाला।मृतक के पिता ने बताया कि उनका बेटे की कंपनी के मैनेजर ने फोन पर शव भेजने का आश्वासन तो दे रहे हैं, लेकिन अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका कि पार्थिव शरीर कब गांव पहुंचेगा। बुजुर्ग माता-पिता और पत्नी की एक ही गुहार है कि शव को जल्द से जल्द वतन वापस लाया जाए ताकि वह अंतिम दर्शन कर सकें।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मोनू यादव ने बताया कि हम लोगों ने उपजिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से विदेश मंत्रालय को ईमेल करा दिया था लेकिन अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं हुआ है अब हम लोग युवक के पिता के साथ विदेश मंत्रालय पहुंचकर बेटे के शव को देश लाए जाने की गुहार लगाएंगे
पत्नी समेत परिवार ने भारत सरकार व विदेश मंत्री व जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मामले में हस्तक्षेप कर इल्तियाक का शव भारत मंगवाया जाए ताकि परिवार अंतिम विदाई दे सके।
भदेसुवा गांव की इस घटना ने हर आंख को नम कर दिया है एक पत्नी अपने पति के अंतिम दर्शन के लिए तरस रही है, वहीं एक मां बेटे के गम में बेसुध पड़ी है एक पिता अपने बेटे को आखिरी बार घर लाने की आस लगाए बैठा है अब सबकी नजरें सरकार पर टिकी हैं।


