
उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की बड़ी खबर… जहां बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Mayawati ने एक बार फिर अलग प्रदेश के मुद्दे को हवा दे दी है।मायावती ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अलग प्रदेश और हाईकोर्ट की बेंच बनने का सपना आखिर कब पूरा होगा, यह कहना मुश्किल है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।दरअसल, बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में जेवर में बने इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के उद्घाटन का जिक्र करते हुए कहा कि इस परियोजना की रूपरेखा और शुरुआती काम बसपा सरकार के दौरान ही शुरू कर दिए गए थे।मायावती ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद एयरपोर्ट का उद्घाटन जरूर हुआ है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की कुछ अहम मांगें अब भी अधूरी हैं। खास तौर पर हाईकोर्ट की अलग बेंच और अलग राज्य की मांग को लेकर उन्होंने चिंता जाहिर की।मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में विकास कार्यों को लेकर सरकार लगातार अपनी उपलब्धियां गिना रही है। ऐसे में बसपा प्रमुख का यह बयान राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग हाईकोर्ट बेंच की मांग लंबे समय से उठती रही है। वकीलों और स्थानीय संगठनों द्वारा कई बार आंदोलन भी किए गए हैं। उनका कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी ज्यादा होने के कारण लोगों को न्याय पाने में काफी परेशानी होती है।यही नहीं, अलग राज्य की मांग भी समय-समय पर जोर पकड़ती रही है। समर्थकों का तर्क है कि बड़े राज्य के कारण प्रशासनिक कार्यों में देरी होती है और क्षेत्रीय विकास प्रभावित होता हैमायावती ने अपने बयान के जरिए एक बार फिर इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है, जिससे साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मायावती का यह बयान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब अन्य दल भी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।हीं, सत्ताधारी दल की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।फिलहाल, मायावती के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य का दर्जा मिलेगा और क्या वहां हाईकोर्ट की अलग बेंच बन पाएगी?




