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पूर्वोत्तर में भारी बारिश, हिमाचल से ओडिशा तक चलेंगी तेज हवाएं; अभी जारी रहेगा तापमान में उतार-चढ़ाव

पूर्वोत्तर में भारी बारिश, हिमाचल से ओडिशा तक चलेंगी तेज हवाएं; अभी जारी रहेगा तापमान में उतार-चढ़ाव

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ, ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण और पूर्वोत्तर क्षेत्र के ऊपर सक्रिय जेट स्ट्रीम के संयुक्त प्रभाव से देश के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं, आंधी और वज्रपात की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में तापमान में भी उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।देशभर में इस समय मौसम का मिला-जुला और अस्थिर रूप देखने को मिल रहा है। एक ओर पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है, वहीं बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि का खतरा मंडरा रहा है। दूसरी ओर दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश के कुरनूल में तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है जबकि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में न्यूनतम तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो मौसम के तीखे विरोधाभास को दिखाता है।दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बादल छाए रह सकते हैं, हल्की बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं और तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे तापमान में हल्की गिरावट और मौसम में कुछ राहत महसूस हो सकती है। पिछले 24 घंटों के दौरान असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बारिश हुई है।अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बारिश हो सकती है। इसके अलावा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी तेज बारिश और हवाओं के आसार हैं। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
देश के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाओं और आंधी की स्थिति बन सकती है। पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में हवा की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इसके अलावा असम, बिहार, तेलंगाना और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में भी तेज हवाएं चलने की संभावना है।भारी बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसलों को नुकसान हो सकता है। खेतों में जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें और तैयार फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें। ओलावृष्टि से बचाव के लिए जाल या कवर का उपयोग किया जा सकता है। छोटे पौधों और नर्सरी को ढककर रखना फायदेमंद रहेगा।

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