
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया संकट के समाधान में पाकिस्तान का नाम आने से बहुत ही ज्यादा नाखुशी जताई है और पहली बार मोदी सरकार की कूटनीति के प्रति मायूसी जताई हैपश्चिम एशिया संकट पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करते रहे हैं। लेकिन, जिस तरह से पाकिस्तान कथित शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनता दिखा है, उसने उन्हें बहुत ही निराश कर दिया है।केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद ने ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध को रोकने में पाकिस्तान का नाम सामने आने पर केंद्र सरकार को लेकर बहुत ही निराशाजनक प्रतिक्रिया दी है। बता दें कि कांग्रेस पार्टी शुरू से इस मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर रही है, जबकि थरूर का स्टैंड अबतक सरकार के पक्ष में था।बुधवार को उन्होंने तिरुवनंतपुरम में न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘इस समय दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि चीजें ठीक नहीं हैं। यह हम सबके लिए शर्मिंदा होने वाली बात है। ईरान युद्ध में हमने सरकार के संयम और चुप्पी को सपोर्ट किया, इसकी एक वजह यह थी कि मुझे लगा कि सरकार इसका इस्तेमाल शांति प्रक्रिया में जगह बनाने और शांति की अगुवा आवाज बनने में करेगी, जैसा कि पीएम मोदी अक्सर भारत के लिए कहते हैं…।’वहीं, पीटीआई को दिए एक और इंटरव्यू में कांग्रेस नेता ने कहा कि शांति की बातचीत पाकिस्तान में हो रही है या नहीं, इससे उन्हें मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं लगभग तीन हफ्तों से कह रहा हूं कि अब भारत को आगे बढ़कर स्टैंड लेना चाहिए, दोनों पक्षों से अच्छे संबंधों का फायदा शांति प्रयासों के लिए उठाना चाहिए।’उन्होंने मध्यस्थता की कोशिशों के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की को ‘गुड लक’ कहा है। उनका कहना है कि ‘हम सब शांति चाहते हैं।”भारत को कोई श्रेय नहीं मिला, जबकि पाकिस्तान पीस टॉक करा रहा है।’




