यूपी

औसानेश्वर मंदिर में भगदड़: एक-दूसरे पर चढ़ते-गिरते भागे चार हजार लोग, चीखों में बदल गया बम-बम का उद्घोष

आधी रात 12 बजे मंदिर के कपाट खुले। श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया। कुछ ही देर बाद बिजली के तार से टिनशेड के पोल में करंट आ गया। इसके बाद लोग जान बचाकर भागने लगे। बम-बम का उद्घोष चीख-पुकार में बदल गया। दुकानदार 10 मिनट तक तो अवाक खड़े रहे। घटना के वक्त मेला परिसर में करीब 20 हजार श्रद्धालु जमा थे। यूपी के बाराबंकी में औसानेश्वर मंदिर के कपाट रविवार रात करीब 12 बजे खुले। तब तक परिसर में करीब 20 हजार से अधिक श्रद्धालु जमा हो चुके थे। श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी था। मंदिर के मुख्य द्वार से लगभग 250 मीटर दूर तक बैरिकेडिंग व टिन शेड के नीचे से लेकर बाहर तक करीब 4000 श्रद्धालु कतार में ठसाठस खड़े थे। चारों ओर बम-बम भोले और हर हर महादेव की गूंज थी। श्रद्धालु बेलपत्र, फूल और प्रसाद की खरीदारी में जुटे थे।रात करीब दो बजे अचानक लोग चीखने लगे। भागो-भागो…करंट फैल गया, कहकर एक-दूसरे पर चढ़ते-गिरते दौड़ पड़े। इस अफरातफरी में कुछ श्रद्धालु करंट लगने के डर से जमीन पर गिर पड़े, जबकि कुछ लोगों के पैर तले दबे। भगदड़ की सूचना मिलते ही मंदिर प्रबंधन की ओर से तुरंत बिजली आपूर्ति बंद कराई गई। वहीं, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सीधे डायरेक्ट कटिंग पॉइंट की ओर दौड़े। आसपास के दुकानदारों को भी मदद के लिए बुलाया गया।मेले में पहले से खड़ी एंबुलेंस ने तत्काल घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया। रात 3:00 बजे तक सभी घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने कुछ ऐसा ही हाल बताया। आसपास के दुकानदारों ने बताया कि पहले तो किसी की समझ में नहीं आया कि क्या हो गया।
बस लोग दौड़ते रहे…
रात में भगदड़ मची तो मैं बैरिकेडिंग के समीप ही था। कुछ समझ पाता इससे पहले भीड़ आई और मेरी दुकान भी गिर गई। जाना कि करंट फैला है तो तुरंत हिम्मत नहीं हुई कि मौके पर जा सकें। लोग चिल्ला रहे थे कि लाइट काटो…। -करुणा शंकर, हलोर रायबरेली
10 मिनट बाद पता लगा करंट उतरा है
मैं मंदिर के पास अपनी चाय की दुकान पर सो गया था। तेज शोर सुनकर जागा तो देखा भगदड़ मची है… पहले लगा मारपीट हो गई है। लोग बस भाग रहे थे। करीब 10 मिनट की भगदड़ व अफरातफरी के बाद पता लगा कि बैरिकेडिंग में करंट उतर आया है। -संदीप गिरी, दुकानदार
जो गिरा वह दबता चला गया
रात करीब दो बजे बैरिकेडिंग में हर कोई भाग रहा था। महिलाएं चिल्ला रही थीं। मैं अपने साथियों के साथ पहुंचा तो देखा कि छह-सात लोग बैरिकेडिंग के अंदर बेसुध पड़े हैं। सैकड़ों लोग इनके ऊपर से निकल चुके थे। हम लोग पहुंचे और उन्हें बाहर लाकर अस्पताल भेजा।

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