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जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए सांसदों ने दिया नोटिस, लोकसभा के 145 और राज्य सभा के 63 सदस्यों ने किया समर्थन

लोकसभा के 145 सदस्यों और राज्यसभा में विपक्ष के 63 सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने के लिए एक ज्ञापन सौंपा है। विपक्ष के लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हालाँकि, राज्यसभा में कार्यवाही फिर से शुरू हो गई है। मानसून सत्र 32 दिनों में कुल 21 बैठकें करेगा और 21 अगस्त को समाप्त होगा। इस बीच, दोनों सदन 12 अगस्त, 2025 को स्थगित रहेंगे और स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए सोमवार, 18 अगस्त को पुनः समवेत होंगे। ये मामला तब शुरू हुआ जब मार्च 2025 में उनकी दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने के बाद भारी मात्रा में नगदी बरामद हुई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायधीश संजीव खन्ना ने उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश की थी। जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस जांच समिति की रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित
संसद के आगामी मानसून सत्र, 2025 से संबंधित मामलों पर चर्चा के लिए 20 जुलाई को राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ एक बैठक आयोजित की गई। हालांकि केंद्र ने ऑपरेशन सिंदूर पर बहस कराने की विपक्ष की मांग को स्वीकार कर लिया है, लेकिन चुनावी राज्य बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर बहस के बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।
संसद में आएगा महाभियोग प्रस्ताव
इस बीच, कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की पूरी तैयारी है। सभी पार्टियों से बात हो चुकी है और संसद की राय एकजुट है। उन्होंने कहा, ‘लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की है। जिन पार्टियों के सिर्फ एक-एक सांसद हैं, उनसे भी बात करूंगा, ताकि संसद का यह रुख सर्वसम्मति वाला हो। वहीं, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह फैसला सरकार का नहीं, बल्कि सांसदों का है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि उनकी पार्टी के सांसद भी महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे। यानी विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों संवैधानिक कार्रवाई के पक्ष में हैं।

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