
नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। उनके राज्यसभा निर्वाचित होने के साथ ही बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। नीतीश कुमार की ओर से विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र देने और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने को लेकर भी कई तरह की सियासी चर्चा हो रही है।बिहार की राजनीति इन दोनों एक बार फिर से पूरे देश में चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। ऐसे में अब इस बात को लेकर कई तरह की संभावनाएं जताई जा रही है कि वो विधानसभा परिषद की सदस्यता से कब इस्तीफा देंगे और मुख्यमंत्री की कुर्सी कब छोड़ेंगे।संसदीय राजनीति और विधायिका से जुड़े जानकारों का मानना है कि नियम के अनुसार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के 14 दिनों के अंदर नीतीश कुमार को एक सदन की सदस्यता से त्यागपत्र देना जरूरी है। ऐसे में 30 मार्च तक का समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास है। इस दौरान उनकी ओर से विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र दिए जाने की संभावना है। बताया गया है कि ऐसा नहीं करने पर उनकी राज्यसभा की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
हालांकि नीतीश कुमार 23 मार्च से एक बार फिर से समृद्धि यात्रा पर निकलने वाले हैं। पांचवें चरण की समृद्धि यात्रा 23 से 26 मार्च तक चलेगी। इस दौरान नीतीश कुमार जहानाबाद, अरवल, कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर और नालंदा समेत 7 जिलों में निश्चय से संबंधित योजनाओं की समीक्षा करेंगे। यात्रा के क्रम में नीतीश कुमार कई सभाओं को भी संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री की इस यात्रा के कार्यक्रम को देखकर जानकारों की ओर से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नीतीश कुमार 26 मार्च के बाद ही सीएम पद की कुर्सी छोड़ेंगे।हालांकि एक चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार फिलहाल विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र दे देंगे। लेकिन अगले कुछ दिनों तक वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बनेगा सकते हैं।
दूसरी तरफ जदयू और बीजेपी के बीच सत्ता संतुलन बदलने की तैयारी को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। नए समीकरण के तहत भाजपा बड़े भाई की भूमिका में आकर मुख्यमंत्री पद संभाल सकती है। जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद मिलेंगे। इस फार्मूले के तहत बीजेपी के पास मुख्यमंत्री के साथ 15 मंत्री पद होगा। जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्रियों समेत 16 मंत्री पद दिए जाएंगे। हालांकि गृह विभाग और विधानसभा का अध्यक्ष पद बीजेपी के पास ही रहने की संभावना है। वहीं विधान परिषद के सभापति का जदयू को मिलने की संभावना जताई जा रही है।




