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राहुल गांधी नागरिकता विवाद पर हाईकोर्ट में बंद कमरे में सुनवाई

राहुल गांधी नागरिकता विवाद पर हाईकोर्ट में बंद कमरे में सुनवाई

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में गुरुवार को राहुल गांधी की कथित नागरिकता विवाद से जुड़ी याचिका पर विस्तृत सुनवाई हुई। यह मामला पहले से ही राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सुनवाई की शुरुआत में ही केंद्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एसबी पाण्डेय ने अदालत से अहम अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई खुले कोर्ट में न की जाए।

सरकार की ओर से दलील दी गई कि गृह मंत्रालय से जुड़े जो दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने हैं, वे अत्यंत गोपनीय प्रकृति के हैं और उनका सार्वजनिक रूप से खुलासा करना राष्ट्रीय हित के विरुद्ध हो सकता है। इस पर न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुरोध स्वीकार कर लिया और सुनवाई को चैंबर में स्थानांतरित कर दिया।

बंद कमरे में चली इस सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी विवेक मिश्रा और सहायक सेक्शन ऑफिसर प्रणव राय अदालत में संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित हुए। अदालत ने इन दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन किया और आवश्यक जांच के बाद रिकॉर्ड को संबंधित अधिकारी को वापस सौंप दिया। हालांकि, सुनवाई चैंबर में होने के कारण दस्तावेजों की सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई।

इस बीच अदालत ने याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार को इस मामले में औपचारिक रूप से पक्षकार बनाने की अनुमति प्रदान कर दी। इससे आगे की सुनवाई में केंद्र सरकार की सीधी भूमिका और स्पष्ट हो सकेगी।

मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल की तारीख तय की गई है, जिसमें आगे की कानूनी प्रक्रिया और दलीलों पर विचार किया जाएगा।

गौरतलब है कि कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने यह याचिका दायर की है। उन्होंने लखनऊ की विशेष एमपी/एमएलए अदालत के 28 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी उस अर्जी को खारिज कर दिया गया था, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता ने अपने आरोपों में कहा है कि मामले में भारतीय नागरिकता, पासपोर्ट अधिनियम और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत गंभीर पहलुओं की जांच होनी चाहिए। उन्होंने अदालत से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए।

फिलहाल, हाईकोर्ट में चल रही यह सुनवाई आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण मोड़ ले सकती है। 6 अप्रैल की अगली तारीख पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, जहां इस संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

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