सदन से हटाए गए बयान, सोशल मीडिया पर हुए हिट
'सियासी फायदे' से एक्सपंज नियमों पर उठे सवाल

सदन से हटाए गए बयान, सोशल मीडिया पर हुए हिट! ‘सियासी फायदे’ से एक्सपंज नियमों पर उठे सवाल
संसद में असंसदीय या आपत्तिजनक टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने यानी एक्सपंज करने की परंपरा डिजिटल दौर में चुनौती बन गई है। लाइव प्रसारण और सोशल मीडिया के कारण हटाए गए बयान तेजी से वायरल हो जाते हैं और राजनीतिक दल भी उनका इस्तेमाल करते हैं। अब सवाल उठ रहा है कि एक्सपंज व्यवस्था प्रभावी है या नए नियमों की जरूरत है।संसद के हर सत्र में कोई न कोई सांसद ऐसी बातें कहते हैं, जिस पर आपत्ति होती है और उसे सदन की कार्यवाही से बाहर कर दिया जाता है। अभी बजट सत्र के दूसरे चरण में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कई सांसदों और एक मंत्री के भाषण से भी ऐसी कुछ लाइनों को हटाया गया। वे बातें सदन की कार्यवाही के रेकॉर्ड में नहीं जाएंगी। यह फैसला चेयर यानी आसन का होता है।पहले सदन की कार्यवाही का लाइव प्रसारण नहीं होता था। दौर बदला, तो कार्यवाही टीवी पर लाइव दिखाई जाने लगी। सदन की कार्यवाही टीवी चैनल के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी दिखती है। वहां कही गई कई बातों के सोशल मीडिया पर वीडियो चलते हैं। सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित होने के कुछ घंटे बाद पता चलता है कि किस शब्द या किन बातों को हटाया गया है। एक्सपंज की गई बातों को दोबारा प्रसारित या प्रकाशित नहीं किया जा सकता, लेकिन तब तक सोशल मीडिया के जरिये वे वीडियो लगभग हर मोबाइल तक पहुंच चुके होते हैं।एक्सपंज होने के बाद भी राजनीतिक दल भी इनका इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाते। पिछले दिनों लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की जिन बातों को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया है, उसका इस्तेमाल उनकी पार्टी और समर्थकों ने सोशल मीडिया पर खूब किया। इसी तरह गृह मंत्री अमित शाह के जिस शब्द को कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनाया गया, वह वीडियो भी सोशल मीडिया पर दौड़ रहा है। अब सवाल है कि एक्सपंज करना सिर्फ औपचारिकता भर रह गया है या इसके लिए दूसरे तरीके भी ईजाद करने होंगे?एक्सपंज का क्या असर होता है, ये सवाल जब संसद के सूत्रों से पूछा तो कई बातें सामने आई। उन्होंने कहा कि पहले मीडिया को यह जानकारी देने में 5-6 दिन लग जाते थे कि सदन की कार्यवाही से क्या हटाया गया है। उस दौरान सदन की कार्यवाही पूरी होने के बाद पूरी फाइल तैयार की जाती थी। कई टेबल पर घूमने के बाद आधिकारिक तौर पर यह बताने में कई दिन बीत जाते थे कि क्या एक्सपंज हुआ। हालांकि, तब सोशल मीडिया इस तरह हावी नहीं था। अब सदन की कार्यवाही पूरी होने के बाद उसी दिन एक्सपंज की पूरी लिस्ट आ जाती है।




