
क्या असम कांग्रेस में अपने ही नेताओं से अपमान और अकेलेपन सहन नहीं कर पाए सांसद प्रद्युत बोरदोलोई? मंगलवार को उन्होंने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया।असम से कांग्रेस के लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके लिए बेहद कठिन था क्योंकि उन्हें कांग्रेस पार्टी के अंदर कई मुद्दों पर लगातार अपमान का सामना करना पड़ रहा था।
बोरदोलोई ने बताया ‘आज मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को छोड़ दिया है और इसके लिए मैं खुश नहीं हूं। लेकिन मैंने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि कांग्रेस पार्टी, विशेष रूप से असम कांग्रेस के भीतर, मुझसे संपर्क करने वाले लोग मुझे बार-बार अपमानित कर रहे थे। कांग्रेस नेतृत्व भी मेरे प्रति सहानुभूति नहीं दिखा रहा था।’सांसद ने आगे कहा कि उनके लिए पार्टी में अकेलापन बहुत बढ़ गया था। उन्होंने स्पष्ट किया “मैं अपने जीवन भर कांग्रेस से जुड़ा रहा, लेकिन हाल ही में मेरी स्थिति इतनी कठिन हो गई कि मुझे यह फैसला लेना पड़ा। मैंने यह इस्तीफा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष को सौंप दिया है।” प्रद्युत बोरदोलोई की यह घोषणा असम कांग्रेस में आंतरिक मतभेदों और नेताओं के बीच बढ़ते तनाव की तरफ इशारा करती है।असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि उनका फिलहाल कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई से कोई संपर्क नहीं है, लेकिन भविष्य में बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजधानी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि अभी तक उनकी प्रद्युत बोरदोलोई से कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बोरदोलोई ने केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क किया होता, तो उन्हें इसकी जानकारी जरूर होती। फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने किसी भाजपा नेता से बात की है।सबसे पहले बात असम विधानसभा की, 2021 के विधानसभा चुनाव में असम की 126 सीटों में से 60 सीटें सत्ताधारी भाजपा ने जीती थीं। वहीं, कांग्रेस के खाते में 29 सीटें गईं थीं। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडी एफ को 16 सीटों पर जीत मिली थी।
वहीं, असम गढ़ परिषद को नौ, यूपीपीएल को छह, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को चार, माकपा को एक सीट पर जीत मिली थी। वहीं, सिबसागर सीट पर निर्दलीय उम्मीदार अखिल गोगोई जीते थे।




