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इजरायल में कायरता के बाद, NCERT पर बनावटी आक्रोश’: पीएम मोदी पर कांग्रेस का बड़ा हमला

कांग्रेस ने एनसीईआरटी की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’वाले विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला किया है और आरोप लगाया है कि इस सबके पीछे वही हैं।एनसीईआरटी की 8वीं के किताब में एक चैप्टर को लेकर हुए विवाद पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुत बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’वाले मुद्दे पर पीएम मोदी ‘बनावटी आक्रोश’ दिखा रहा हैं। कांग्रेस सांसद और उसके संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद विवाद से अलग दिखाने की कोशिश ‘हिपोक्रेसी’ है।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट लिखा है, ‘इजरायल में वास्तविक नैतिक कायरता दिखाने के बाद प्रधानमंत्री, अब एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुद्दे पर बनावटी आक्रोश जता रहे हैं। साफ तौर पर डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तहत यह संदेश दिया जा रहा है कि वे एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों में न्यायपालिका को लेकर आलोचनात्मक उल्लेखों से बहुत नाखुश हैं।’दरअसल, ऐसे संकेत मिले हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने से पहले) को ही कैबिनेट की बैठक के दौरान एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका को लेकर विवादास्पद चीजें शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई थी। सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने कहा था, ‘आठवीं क्लास के बच्चों को सोशल साइंस के पाठ्य पुस्तक में हम क्या पढ़ा रहे हैं?लेकिन, कांग्रेस का आरोप है कि इस सबके पीछे खुद प्रधानमंत्री मोदी हैं। पार्टी सांसद ने आगे लिखा है, ‘एक दशक से उन्होंने ऐसे शिक्षाविदों और झोला छाप अकादमिकों के नेटवर्क की अगुवाई की है, जिन्होंने अपने विचारधारात्मक वायरस से पाठ्य पुस्तकों को संक्रमित कर गंभीर नुकसान किया है। यह कोई आकस्मिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक घुसपैठ अभियान का हिस्सा है…प्रधानमंत्री मोदी स्वयं नागपुर कम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग ऑफ टेक्स्टबुक्स -जो असली एनसीईआरटी है, को दिशा और आकार देते रहे हैं। ‘कांग्रेस नेता का कहना है, ‘सुप्रीम कोर्ट को नाराज करने वाली पाठ्य पुस्तकों से खुद को अलग दिखाने की उनकी कोशिश सिर्फ हिपोक्रेसी है। अब सुप्रीम कोर्ट को अगला तार्किक कदम ये उठाना चाहिए कि वह इस बात की विस्तृत जांच करवाए कि पाठ्य पुस्तकों को किस तरह से दोबारा लिखा गया और वे किस तरह ध्रुवीकरण तथा राजनीतिक हिसाब-किताब चुकाने के औजार में बदल दी गईं।’

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