
अमित शाह ने कहा कि कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं अब शून्य हो गई हैं। उन्होंने बताया कि वहां उद्योग स्थापित हो रहे हैं और विकास की नई राहें चल रही हैं। शाह ने कहा कि इन प्रगति का बड़ा हिस्सा सीआरपीएफ, बीएसएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस जैसे सुरक्षा बलों का योगदान है। यह संदेश है कि सुरक्षा बलों ने न केवल आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ लड़ाई लड़ी है, बल्कि वहां शांति और स्थिरता भी स्थापित की है।
पूर्वोत्तर में शांति प्रयास:
शाह ने पूर्वोत्तर राज्यों में शांति बहाल करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मणिपुर में हाल ही में जातीय हिंसा के दौरान, सीआरपीएफ को तैनात किया गया था। इन जवानों की भूमिका इस क्षेत्र में शांति और सामान्य जीवन व्यवस्था को बनाए रखने में अहम रही है। उनका मानना है कि सुरक्षा बलों का यह प्रयास क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
माओवाद के खिलाफ संघर्ष:
शाह ने कहा कि जब भारत सरकार ने माओवाद को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया, तो इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई सीआरपीएफ और कोबरा जवानों ने। उन्होंने इन जवानों के बलिदान और समर्पण की प्रशंसा की। यह बयान साफ दर्शाता है कि सुरक्षा बलों ने न केवल बाहरी खतरों से लड़ाई लड़ी है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सुरक्षा बलों का योगदान और देश का विश्वास:
शाह ने कहा कि ये बल देश की सुरक्षा, स्थिरता और प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने जवानों का सम्मान किया और कहा कि इनकी सेवा से ही भारत मजबूत हो रहा है। यह भाषण देशभक्ति और देश के प्रति सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।




