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राष्ट्रीय गीत को लेकर बड़ा फैसला: ‘वंदे मातरम्’ के 6 अंतरे अनिवार्य, प्रस्तुति का समय निर्धारित

भारत सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब आधिकारिक उत्सवों पर इस गीत के पूरे छह छंदों वाला संस्करण ही प्रस्तुत किया जाएगा। इस पूरे गायन या वादन के लिए 3 मिनट 10 सेकंड का समय तय किया गया है। किन मौकों पर लागू होंगे ये नियम? यह नया प्रोटोकॉल तिरंगा फहराते समय और देश के राष्ट्रपति से जुड़े कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से लागू होगा। राष्ट्रपति के आगमन पर, उनके भाषण की शुरुआत और समापन के समय इसी निर्धारित अवधि के साथ गीत बजाया जाएगा। यही नियम राज्यों के राज्यपालों के लिए भी तय किया गया है। उनके सरकारी कार्यक्रमों और संबोधनों के दौरान भी इसी संस्करण का पालन करना होगा। छंद 1 वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्। शस्यशामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं। फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं। सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं। सुखदां वरदां मातरम्।। वन्दे मातरम्।। छंद 2 वन्दे मातरम्। कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले। कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले। अबला केन मा एत बले। बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं। रिपुदलवारिणीं मातरम्।। वन्दे मातरम्।। छंद 3 वन्दे मातरम्। तुमि विद्या, तुमि धर्म। तुमि हृदि, तुमि मर्म। त्वं हि प्राणाः शरीरे। बाहुते तुमि मा शक्ति। हृदये तुमि मा भक्ति। तोमारई प्रतिमा गडि। मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।। वन्दे मातरम्।।  छंद 4 वन्दे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी। कमला कमलदलविहारिणी। वाणी विद्यादायिनी। नमामि त्वाम्। नमामि कमलां अमलां अतुलां। सुजलां सुफलां मातरम्।। वन्दे मातरम्।। छंद 5 वन्दे मातरम्। श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां। धरणीं भरणीं मातरम्। शत्रु-दल-वारिणीं। मातरम्।। वन्दे मातरम्।। छंद 6 वन्दे मातरम्। त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति। त्वं हि शक्ति मातरम्। वन्दे मातरम्।। बदलाव के पीछे का उद्देश्य प्रशासन का मानना है कि इस कदम से राष्ट्रीय गीत के मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी। अलग-अलग कार्यक्रमों में होने वाली प्रस्तुतियों में एकरूपता लाने के लिए यह समय सीमा और छंदों की संख्या तय की गई है। अब सभी सरकारी आयोजनों में इसी तय मानक के अनुसार वंदे मातरम् की गूंज सुनाई देगी। इतिहास और महत्व: ‘वंदे मातरम्’ मूलतः बंगाल के लिए लिखा गया गीत था। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में बंगदर्शन पत्रिका में प्रकाशित किया और बाद में नॉवेल आनंदमठ में शामिल किया। यह गीत मातृभूमि के लिए सम्मान और प्रेम की अभिव्यक्ति है, जो स्वतंत्रता संग्राम के समय छात्रों और सैनिकों में विशेष रूप से गाया जाता था।

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