दुनियादेश

‘निवेश बढ़ाने और सट्टेबाजी पर लगाम’, वित्त मंत्री ने बताया बजट में किन चीजों को दी गई प्राथमिकता

नई दिल्ली
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार की बजट रणनीति में निवेश को प्राथमिक औजार बनाया गया है, ताकि आर्थिक वृद्धि को टिकाऊ बनाए रखा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट का फोकस ऐसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर है, जहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता मौजूद है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि यह वैश्विक अनिश्चितता की वजह से हो रहा है। इससे पता चलता है कि निवेशकों को फिलहाल किसी एक मुद्रा पर पूरा भरोसा नहीं है, इसलिए वे सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं।
फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर एसटीटी बढ़ाने को लेकर उन्होंने कहा कि यह एक तरह की रोक है, ताकि लोग बिना सोचे-समझे सट्टेबाजी में न कूदें और जोखिम को समझकर ही निवेश करें।
विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन पर सरकार पीछे नहीं हटेगी। इस प्रक्रिया को आगे भी जारी रखा जाएगा, जिससे सरकारी कंपनियों (CPSEs) में पब्लिक हिस्सेदारी बढ़ेगी।
वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले महीनों में लोगों की खर्च करने की क्षमता यानी निजी उपभोग मजबूत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए तय घाटा लक्ष्य दिखाता है कि सरकार की प्राथमिकता विकास को रफ्तार देना है।
इसके अलावा, सरकार 9 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे हिस्से में दिवाला और शोधन अक्षमता कानून (IBC) में संशोधन से जुड़ा विधेयक लाएगी, ताकि व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया सही दिशा में चल रही है। साथ ही, पीएसयू में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की रफ्तार से गैर-कर राजस्व की दिशा तय होगी।
आर्थिक विकास दर बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता
सीतारमण ने कहा है कि 7-8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि इससे सभी नागरिकों को फायदा होगा और ज्यादा रोजगार पैदा होंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था की रफ्तार अच्छी रहती है, तो उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे तेजr से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने के लिए 7 से 8 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखनी होगी।

सीतारमण ने कहा कि आर्थिक विकास से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, ज्यादा लोग कार्यबल से जुड़ते हैं और उत्पादकता में सुधार होता है। महिलाओं की भागीदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नियोक्ता अब महिलाओं की दक्षता और सटीक कामकाज को अधिक महत्व देने लगे हैं। इसका असर यह है कि सेमी-स्किल्ड नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है।

हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि बोर्डरूम और नेतृत्व के स्तर पर महिलाओं की मौजूदगी अभी भी कम है। वित्त मंत्री ने कहा कि ज्यादा महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आना चाहिए, ताकि वे फैसलों को प्रभावित कर सकें और दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!