
लंदन
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी गई टैरिफ की धमकी पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। स्टार्मर ने साफ कहा कि सहयोगी देशों पर दबाव बनाने का यह तरीका पूरी तरह गलत है और किसी भी तरह का व्यापार युद्ध किसी के हित में नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी दबाव या धमकी से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और संवाद से चलती है।
स्टार्मर की यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि अगर यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण का समर्थन नहीं किया तो फरवरी से उनके सामानों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इस सूची में ब्रिटेन सहित आठ यूरोपीय देश शामिल बताए गए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड अहम है।
उनके मुताबिक यहां से मिसाइल डिफेंस सिस्टम को और मजबूत किया जा सकता है।
ट्रंप ने आशंका जताई कि रूस और चीन इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।
इसी वजह से उन्होंने सहयोगी देशों पर दबाव बनाने के संकेत दिए।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन ग्रीनलैंड और डेनमार्क के उस बुनियादी अधिकार का समर्थन करता है, जिसके तहत वे अपने भविष्य का फैसला खुद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि साझेदारी का मतलब यह नहीं कि सिद्धांतों से समझौता कर लिया जाए। स्टार्मर ने यह भी साफ किया कि अमेरिका-ब्रिटेन संबंध अहम हैं, लेकिन मतभेदों को नजरअंदाज करना समाधान नहीं है।
स्टार्मर ने दो टूक कहा कि व्यापार युद्ध से सभी को नुकसान होता है। उन्होंने संकेत दिया कि ब्रिटेन फिलहाल जवाबी टैरिफ पर विचार नहीं कर रहा है और उसकी प्राथमिकता यही है कि स्थिति वहां तक पहुंचे ही नहीं। उनके मुताबिक बातचीत के रास्ते खुले रखना ही सबसे बेहतर विकल्प है, ताकि हालात बिगड़ने से रोके जा सकें।
ब्रिटेन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह यूरोपीय सहयोगियों, नाटो और अमेरिका के साथ मिलकर इस मुद्दे पर संवाद जारी रखेगा। स्टार्मर का कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में सहयोग और संतुलन ज्यादा जरूरी है, न कि टकराव। ग्रीनलैंड को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर पश्चिमी देशों के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है।




