
मिशन यूपी 2027 के लिए भाजपा ने नया फार्मूला तैयार किया है। सवर्णों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पर भाजपा का जोर रहेगा। दलित-ओबीसी जातियों के नेताओं को भी संगठन में अहम पद मिलेंगे।
उत्तर प्रदेश की सत्ता में लगातार तीसरी बार आने के लिए भाजपा ने नया फार्मूला तैयार किया है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भी सहमति बताई जा रही है। मिशन यूपी 2027 को फतह करने की राह में आ रही बाधाओं को दूर किया जाएगा।इसमें संगठन विस्तार से लेकर कार्यकर्ताओं को सरकार में समायोजित करने का फुलप्रूफ फॉर्मूला तैयार किया गया है। इससे विभिन्न जातियों छत्रपों के साथ ही नाराज व निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को भी मनाया जाएगा। यूजीसी एक्ट से उपजी सवर्ण जातियों की नाराजगी को भी दूर करने की कोशिश जारी है।
2027 के विधानसभा चुनाव में अधिक समय नहीं होने के कारण भाजपा और आरएसएस अपने स्तर पर सक्रिय है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संघ पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक करने निकले हैं।
पांच मार्च को गाजियाबाद में मुख्यमंत्री ने पश्चिम उत्तर प्रदेश की समन्वय बैठक में भाग लिया। इस दौरान सरकार के कामकाज को लेकर फीडबैक और संघ पदाधिकारियों के सुझाव लिए गए। इस दौरान सरकारी कामकाज की दिक्कतें भी मुख्यमंत्री के सामने उठाई गई। मुख्यमंत्री की सक्रियता से चुनावी माहौल तैयार हो रहा है।
भाजपा के कैडर वोटर में सवर्ण जातियां शामिल है। यूजीसी एक्ट के बाद जिस तरह से सवर्ण जातियों ने विरोध का बिगुल बजाया है, उससे भाजपा में खलबली मची है। कोई भी भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि यूजीसी एक्ट पर सीधा जवाब नहीं दे रहा है, जबकि युवाओं में आक्रोश धीरे-धीरे पनप रहा है। आरएसएस की ओर से भाजपा को इस ओर ध्यान देने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में भाजपा नेता व जनप्रतिनिधि इस मामले को कोर्ट में बताकर माहौल को बदलने की कोशिश में भी जुटे हैं। भाजपा की मंशा इस विरोध को आंधी बनने से रोकने की है।
चुनाव में बहुत कम समय बचने के कारण भाजपा तेजी से कदम उठा रही है। पिछले एक साल से अधिक समय से चल रहे संगठन चुनाव शीघ्र ही पूरे होंगे। इसमें नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को घोषणा, क्षेत्रीय कार्यकारिणी का गठन, जिला व महानगर कार्यकारिणी का गठन, प्रदेश कार्यकारिणी का गठन करके पार्टी नेताओं को समायोजित किया जाएगा।




