
पूर्वोत्तर राज्य असम में सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) 2019 में बांग्लादेश में जन्मीं महिला को भारत की नागरिकता दी गई है। महिला दिवस से पहले दीपाली राज्य की पहली ऐसी महिला बनी हैं जो पहले विदेशी थीं लेकिन अब उनकी पहचान भारतीय की हो गई है। उन्हें इसके लिए 37 साल का इंतजार करना पड़ा।पूर्वोत्तर राज्य असम में दीपाली दास नागरिकता संशोधन कानून (सीएएस) कानून के तहत भारत की नागरिकता पाने वाली पहली हिंदू महिला बनी हैं। बांग्लादेश में जन्मी दीपाली दास को 6 मार्च को यह नागरिकता दी गई। उन्हें विदेशी के तौर पर पकड़ा गया था। इसके बाद डिटेंशन सेंटर में रखा गया था। तब उनके खिलाफ यह कार्रवाई इसलिए की गई थी क्योंकि एजेंसियों ने उनकी पहचान एक अवैध शरणार्थी के तौर पर की थी। दो साल तक डिटेंशन कैंप में रहीं दीपाली अब पहली हिंदू महिला बन गई हैं जिन्हें असम में भारत की नागरिकता दी गई है। दीपाली को ऐसे समय पर नागरिकता मिली है जब राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अवैध शरर्णियों (विशेष तौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या) के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए हैं। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं।60 साल की हिंदू महिला दीपाली को सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता दे दी है। वह धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए बांग्लादेश से भारत आई थी। पहले उन्हें पकड़कर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। दीपाली को 8 फरवरी 1988 से भारतीय माना जाएगा।इसी तारीख को वह भारत में आई थीं। दीपाली का जन्म 1966 में बांग्लादेश के सिलहट जिले में हुआ था। वहां पर धार्मिक उत्पीड़न के बाद उन्होंने बांग्लादेश को छोड़कर भारत में घुसपैठ की थी। तब उन्हें अवैध शरणार्थी माना गया था, क्योंकि वह हिंदू है, इसलिए वह CAA के तहत नागरिकता के लिए योग्य है। गौरतलब हो कि सीएए कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़गानिस्तान से सताए गए गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता का रास्ता देता है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में आए थे।2019 में अजमल हुसैन लस्कर नाम के एक पुलिस अधिकारी की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया। इसके बाद साल 5 मई को गिरफ्तार कर किया गया। दीपाली ने सिलचर सेंट्रल जेल डिटेंशन कैंप में लगभग दो साल बिताए। महिला को 2021 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार रिहा किया गया। तब सुप्रीम कोर्ट ने कोराना महामारी को देखते हुए दो साल पूरे कर चुके कैदियों को रिहा करने की इजाजत दी गई थी।




