“वीआईपी गांव के विकास पर राजनीति की दीवार: कुछ नेताओं की चुप्पी से बच्चों की राह बनी जानलेवा!”
✍️विनोद दीक्षित
“वीआईपी गांव के विकास पर राजनीति की दीवार: कुछ नेताओं की चुप्पी से बच्चों की राह बनी जानलेवा!”
उन्नाव। जनपद के विकास खंड हिलौली के लऊवा गांव में इन दिनों विकास नहीं बल्कि राजनीति की परछाईं नजर आ रही है। वीआईपी गांव के नाम से पहचाने जाने वाले इस गांव की सड़कों पर आज खतरा पसरा हुआ है और आम ग्रामीणों का चलना-फिरना दूभर हो गया है। आरोप है कि गांव के एक दबंग व्यक्ति ने मनमाने ढंग से सड़क के फुटपाथ को खोदकर नाला बना दिया जिससे सड़क की मजबूती लगातार कमजोर होती जा रही है और हादसे का खतरा बढ़ता जा रहा है। रोजाना स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों की राह अब जोखिम भरी हो गई है, गड्ढों और उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरते समय कई बच्चे फिसलते-फिसलते बचे हैं जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। महिलाएं और बुजुर्ग सहमे हुए इस रास्ते से गुजर रहे हैं जबकि दोपहिया वाहन चालक संतुलन बनाने के लिए जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह खुदाई बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के की गई है फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई जिससे लोगों में आक्रोश पनप रहा है। सबसे बड़ा आरोप यह है कि कुछ राजनीतिक व्यक्ति नहीं चाहते कि गांव की यह समस्या हल हो और निजी स्वार्थ व आपसी खींचतान के कारण मामले को जानबूझकर उलझाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजनीति बीच में न आती तो समाधान कब का निकल चुका होता लेकिन विकास से अधिक महत्व व्यक्तिगत समीकरणों को दिया जा रहा है। बारिश के दिनों में यह अवैध नाला और खतरनाक रूप ले सकता है तथा सड़क धंसने की आशंका भी जताई जा रही है जिससे किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। सरकारी धन से बनी सड़क की आयु पर संकट गहरा रहा है और विकास कार्यों पर सवाल उठ रहे हैं। गांव के युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। फिलहाल लऊवा गांव के लोग राहत और न्याय की उम्मीद में प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं ताकि वीआईपी गांव की पहचान बची रहे और बच्चों की राह फिर से सुरक्षित हो सके।



