
नेशनल डेस्क: असम ने एक बड़ा और दिलचस्प कदम उठाया है। देश में पहली बार कोई राज्य केंद्र से पहले ही अपने कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग का गठन कर रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 1 जनवरी 2026 को इसकी घोषणा की और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभास दास को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। यह आयोग राज्य के लगभग 7 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा।
हालांकि असम ने आयोग के गठन में पहल कर ली है, इसका मतलब यह नहीं कि वेतन वृद्धि तुरंत लागू हो जाएगी। आयोग की सिफारिशें आम तौर पर 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएंगी। राज्य सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति और संसाधनों का मूल्यांकन करना होगा। अनुमान है कि वास्तविक वेतन वृद्धि की प्रक्रिया लगभग 18 महीने तक चल सकती है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि असम के कर्मचारी प्रक्रिया में तेज़ी लाने में सफल तो रहे हैं, लेकिन वेतन बढ़ोतरी का वास्तविक लाभ केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर या उससे पहले मिलने के लिए सरकार की मंजूरी और फाइनेंशियल एप्रूवल पर निर्भर करेगा।
केंद्र सरकार ने भी 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी नए वेतनमान की प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2026 होगी। यदि लागू करने में कुछ देरी होती है, तो पिछली अवधि का एरियर कर्मचारियों को भुगतान किया जाएगा।
विश्लेषकों का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग लागू होने के बाद बेसिक सैलरी में 30% से 34% तक की वृद्धि संभव है। फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 2.86 या इससे अधिक करने की चर्चाएँ हैं। इसका मतलब यह है कि वर्तमान में 18,000 रुपये के न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी के बाद यह 35,000 से 50,000 रुपये तक पहुँच सकता है।
हालांकि असम ने इस मामले में सबसे पहले कदम उठाया है, लेकिन वेतन वृद्धि की वास्तविक राशि और भुगतान की समयसीमा पूरी तरह से राज्य और केंद्र की कैबिनेट अनुमोदन पर निर्भर करेगी।




