
राजनीतिक गलियारों में अक्सर कहा जाता है कि राजनीति में ‘न कोई स्थाई दोस्त होता है और न ही स्थाई दुश्मन’। महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने इस कहावत को पूरी तरह सच कर दिया है। यहाँ सत्ता की कुर्सी के लिए देश की राजनीति के दो विरोधी धुर BJP और कांग्रेस एक साथ आ गए हैं।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ नगर परिषद में इस समय सियासी पारा चढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में बीजेपी ने अपनी ही सहयोगी पार्टी ‘शिवसेना (शिंदे गुट)’ को सत्ता से बाहर रखने के लिए धुर विरोधी कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया है।
बीजेपी की तेजश्री करंजुले नगर परिषद अध्यक्ष चुनी गई हैं। कांग्रेस के 12 पार्षदों के समर्थन के बिना बीजेपी के पास केवल 20 पार्षदों का साथ था, जो बहुमत के आंकड़े से काफी दूर था।
बीजेपी और कांग्रेस के इस गठबंधन से शिवसेना (शिंदे गुट) में भारी नाराजगी है। शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इसे ‘अभद्र गठबंधन’ करार देते हुए कहा कि जो बीजेपी ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ का नारा देती है, उसी ने सत्ता के लालच में शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपा है।
बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल का कहना है कि उन्होंने महायुति (गठबंधन) बनाए रखने की कोशिश की थी, लेकिन शिंदे गुट की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 25 वर्षों से नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए यह कड़ा फैसला लेना जरूरी था।




