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ऐतिहासिक कर्नाटक मंदिर: जहां विवाह रचाना था परंपरा, अब 6 साल से बैन—आखिर वजह क्या?

बेंगलुरु स्थित हलासुरु के ऐतिहासिक सोमेश्वर स्वामी मंदिर में पिछले कुछ वर्षों से विवाह समारोह आयोजित नहीं किए जा रहे हैं। मंदिर प्रबंधन ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि मंदिर के बारे में गलत जानकारी फैलने और किसी तरह की भ्रांति पैदा होने से रोकने के लिए यह निर्णय पहले ही लिया गया था।

जानकारी के अनुसार, पिछले 6-7 सालों से मंदिर में किसी भी जोड़े का विवाह समारोह नहीं हुआ है। मंदिर में विवाह कराने वाले कुछ जोड़े जब आपसी समझौते में असफल होते थे, तो वे अदालत का रुख कर तलाक के लिए अर्जी दाखिल कर देते थे। तलाक की सुनवाई के दौरान पुजारियों को भी अदालत में पेश होना पड़ता था। इस वजह से पुजारियों ने मंदिर में विवाह कराने से इनकार कर दिया।

मंदिर प्रबंधन का बयान
मंदिर के वर्तमान कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि सोमेश्वर स्वामी मंदिर की छवि धूमिल होने और इसके बारे में गलत प्रचार फैलने से बचाने के लिए प्रबंधन बोर्ड ने विवाह समारोह रोकने का निर्णय लिया। अधिकारी ने बताया कि पूर्व कार्यकारी अधिकारियों ने मौखिक रूप से वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को इस फैसले से अवगत कराया था।

सोमेश्वर स्वामी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
सोमेश्वर स्वामी मंदिर देवों के देव महादेव को समर्पित है और इसमें भगवान शिव व पार्वती दोनों की पूजा होती है। यह मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका निर्माण चोल वंश काल में हुआ माना जाता है। मंदिर की दीवारों में विजयनगर शैली की वास्तुकला देखने को मिलती है, जिनकी नक्काशी दर्शकों को आकर्षित करती है। यही कारण है कि इस मंदिर को भगवान शंकर के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण मंदिरों में गिना जाता है।

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