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प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली में कृत्रिम वर्षा की योजना, विशेषज्ञों ने उठाए सवाल— पहले किन शहरों में हुआ परीक्षण

दिल्ली में कृत्रिम बारिश कराने से जुड़ी पूरी योजना क्या है? इसे कैसे और किस तकनीक के जरिए कराया जाएगा? यह तकनीक कितनी प्रभावी है और इसकी चुनौतियां क्या हैं? दुनिया के किन देशों में कृत्रिम बारिश कराई जा चुकी है और इसका नतीजा क्या रहा है? भारत में पहली बार कृत्रिम बारिश कराए जाने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। दिल्ली में क्लाउड सीडिंग का पहला परीक्षण हो गया है। आज बुराड़ी और करोल बाग इलाके में कानपुर से आए विमान ने क्लाउड सीडिंग की। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि बुराड़ी और करोल बाग इलाकों सहित दिल्ली के कुछ हिस्सों में क्लाउड-सीडिंग का पहला परीक्षण किया गया है। अब बारिश का इंतजार किया जा रहा है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर दिल्ली में कृत्रिम बारिश कराने से जुड़ी पूरी योजना क्या है? इसे कैसे और किस तकनीक के जरिए कराया जाएगा? यह तकनीक कितनी प्रभावी है और इसकी चुनौतियां क्या हैं? दुनिया के किन देशों में कृत्रिम बारिश कराई जा चुकी है और इसका नतीजा क्या रहा है?पहले जानें- कब से चल रही दिल्ली में कृत्रिम बारिश कराने की कवायद?
दिल्ली में बीते कई साल से प्रदूषण का प्रकोप दर्ज किया जा रहा है। खासकर मानसून सीजन के खत्म होने और ठंड के मौसम के दौरान दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक काफी ऊपर रहा है। दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 (पीएम यानी पर्टिकुलेट मैटर) कणों की संख्या 300-450 के बीच पहुंच चुकी है। यह दूषित हवा श्वास नली के जरिए लोगों के शरीर में घुसकर उन्हें बुरी तरह प्रभावित करता है। इन परिस्थितियों के मद्देनजर दिल्ली में लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू किया है। प्रदूषण को कम करने और लोगों को बचाने की इस योजना को प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण की इसी समस्या से निपटने के लिए कृत्रिम वर्षा कराने की योजना बनाई गई। हालांकि, इसके बारे में पहली बार जिक्र आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के दौरान किया गया था। 2023 में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने केंद्र सरकार को एक चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि क्षेत्र में कृत्रिम वर्षा कराने की अनुमति दी जाए। राय ने आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों और केंद्रीय एजेंसियो के अधिकारियों की एक बैठक भी बुलाने की मांग की थी।
अब जानें- दिल्ली में कृत्रिम वर्षा कराने की योजना क्या है?
दिल्ली में इस साल भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही प्रदूषण खत्म करने के लिए कृत्रिम वर्षा को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। खुद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इससे जुड़े एलान किए। पहले भी दिल्ली में कृत्रिम बारिश के ट्रायल पर चर्चाएं हुईं, हालांकि दिवाली के बाद लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता के चलते कृत्रिम बारिश कराने का फैसला अब लिया गया।
कृत्रिम बारिश के बारे में इसकी रासायनिक प्रक्रिया को समझना बेहद जरूरी है।
- जब असक्रिय बादलों पर केमिकल डाला जाता है तो वातावरण में मौजूद जलीय वाष्प (वॉटर वेपर्स) छोटे-छोटे कणों के आसपास जमा हो जाते हैं और बूंदों के तौर पर इकट्ठा होते हैं। यानी यह नमक के कण इन बूंदों के लिए एक अतिरिक्त न्यूक्लियस (केंद्र) का काम करते हैं।
- इस न्यूक्लियस की खासियत यह होती है कि यह एक के बाद एक वाष्प को बूंदों के तौर पर अपने पास इकट्ठा कर लेता है। यह बूंदें जैसे-जैसे बढ़ती हैं और भारी होती हैं, वैसे ही इनका टकराव बढ़ता है। इसी कारण बादल सक्रिय होते हैं और बारिश होती है।




