सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रही ईंट लदी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रालियां,सड़के असुरक्षित
✍️आर.एस.तिवारी

लखनऊ/ ग्रामीण क्षेत्रों व पड़ोस के जिलों में स्थापित वैध, अवैध ईंट भट्ठों से क्षमता से कई गुना ईंटों को लेकर लखनऊ शहर की मंडियों में ले जाने वाले अवैध ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़कों पर काल बनकर दौड़ रहीं हैं। लेकिन इनको रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग इस ओर आंखे मूंदे हुए हैं। परिणामतः यह ट्रॉलियां लोगों को मौत बांट रहीं हैं। कहने को तो पुलिस और परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा का अभियान चलाता है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ रिफ्लेक्टर लगाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है।
लेकिन ये ओवरलोड कालदूत दिनप्रतिदिन सड़कों पर मौत बांट रहे है। सैंकड़ों की संख्या में संचालित इन ट्रॉली पर कोई कार्रवाई नहीं होती। मोटर व्हीकल एक्ट के नाम पर सिर्फ दोपहिया वाहनों पर ही कार्रवाई का दिखावा कर लिया जाता है।
किसी भी सामान्य ट्रैक्टर-ट्रॉली में सामान्यतः 1500 -2000 ईंटों के परिवहन की क्षमता होती हैं। लेकिन अधिक मुनाफे के चक्कर में क्षेत्र में ऐसे ट्रॉले बनाए जाते हैं, जिनमें दो की जगह 4 पहिए लगाए जाते हैं। इनका आकार भी सामान्य ट्रॉली से काफी बड़ा होता है। इस प्रक्रिया के बाद उनकी छमता लगभग 3000 की हो जाती है। लेकिन इन ट्रॉली में जितनी ईंटें ट्रॉली बॉक्स के अंदर होती है उतनी ही ऊपर खुली लाद दी जाती है। ऐसे में यह अपनी वास्तविक क्षमता से 4 गुना तक ईंटें भर लेते हैं जो सामान्यत: एक ट्रक की क्षमता के बराबर होती है।
इस चार गुना भार को खींचने में ट्रैक्टर के अगले पहिए जमीन पर से ऊंचे उठ जाते हैं और चालक का नियंत्रण इस पर काफी कम रह जाता है। ऐसे में यह सड़कों पर काल दूत बनकर दौड़ते दिखाई देते हैं। किसानों के कृषि प्रयोगार्थ होने के कारण इनका रजिस्ट्रेशन शुल्क अत्यंत न्यून होता है, लेकिन यह सभी ट्रोले कृषि कार्य के स्थान पर सिर्फ व्यापारिक प्रयोगार्थ मोटी कमाई के लिए ही प्रयुक्त किए जा रहे हैं ।
प्रतिदिन दर्जनों ट्रॉलियां मौरावां- मोहनलालगंज मार्ग,रायबरेली-लखनऊ हाइवे,कानपुर-लखनऊ हाइवे,हरदोई-लखनऊ मार्ग,सीतापुर-लखनऊ हाइवे,सुल्तानपुर-लखनऊ मार्ग,अयोध्या-लखनऊ हाइवे व अन्य कई लिंक मार्गों से लखनऊ शहर की ओर निकलते हैं जो बीच में कई थाने और चौकी होने के बाद भी निर्वाध संचालित होकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कलई खोलते है।
लखनऊ सहित प्रदेश के कई हिस्सों में ईंटों से लदी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खतरनाक तरीके से सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं और लोगों की मौत हो रही है. इन ट्रॉलियों से सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरा है क्योंकि ये बिना रोक-टोक के रफ्तार भरती हैं, जिससे अन्य वाहन चालक और पैदल यात्री भी चपेट में आ जाते हैं. कृषि कार्य के लिए बनी ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग, नियमों की अनदेखी और परिवहन विभाग व पुलिस द्वारा कार्रवाई में कमी इस समस्या को और बढ़ा रही है, जिससे यह सड़कों पर मौत का पर्याय बन गई है.


