महाराष्ट्र

‘मराठवाड़ा के मराठों को कुनबी घोषित करें, तुरंत आरक्षण दें’; प्रतिनिधिमंडल से बोले मनोज जरांगे

शिंदे और जारंगे के बीच हुई पूरी बातचीत का मराठी समाचार चैनलों पर सीधा प्रसारण किया गया। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संदीप शिंदे तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार की ओर से सितंबर 2023 में मराठा समुदाय के सदस्यों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र जारी करने की पद्धति तय करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष हैं।मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शनिवार को उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे के नेतृत्व वाले एक प्रतिनिधिमंडल से कहा कि सरकार को मराठवाड़ा के सभी मराठों को कुनबी घोषित करना चाहिए और उन्हें आरक्षण देना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार दोपहर दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में जरांगे से मुलाकात की। वह मराठा समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।जरांगे ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति ने पिछले 13 महीनों से इस मुद्दे से संबंधित राजपत्रों का अध्ययन किया है। अब समय आ गया है कि पैनल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे, ताकि मराठों को कुनबी का दर्जा मिल सके। जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मराठों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए। कुनबी एक कृषि प्रधान जाति, जो ओबीसी श्रेणी में शामिल है, जिससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र बनेंगे।जारंगे ने कहा, ‘मराठवाड़ा में मराठों को कुनबी घोषित किया जाना चाहिए। उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिए हैदराबाद और सतारा राजपत्रों को कानून बनाया जाना चाहिए। जवाब में सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे ने कहा कि उन्हें ऐसी रिपोर्ट देने का अधिकार नहीं है। शिंदे ने कहा कि यह पिछड़ा वर्ग आयोग का काम है। उन्होंने आगे कहा, ‘जाति प्रमाण पत्र व्यक्तियों को दिया जाता है, पूरे समुदाय को नहीं।’शिंदे और जारंगे के बीच हुई पूरी बातचीत का मराठी समाचार चैनलों पर सीधा प्रसारण किया गया। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संदीप शिंदे तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार की ओर से सितंबर 2023 में मराठा समुदाय के सदस्यों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र जारी करने की पद्धति तय करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष हैं।समिति को पूर्ववर्ती हैदराबाद और बॉम्बे राज्यों के अभिलेखों का अध्ययन करने के लिए कहा गया था, जहां मराठों का उल्लेख कभी-कभी कुनबी के रूप में किया जाता है। शुरुआत में मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए नियुक्त इस समिति का दायरा बाद में पूरे राज्य तक बढ़ा दिया गया।

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