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जेलेंस्की के साथ यूरोपीय नेता भी US पहुंचेंगे, ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में बैठक होगी

व्हाइट हाउस में सोमवार को होने वाली अहम बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ यूरोपीय संघ और नाटो के प्रमुख नेता भी शामिल होंगे। यूरोप यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अमेरिका और रूस के बीच किसी भी शांति समझौते में यूक्रेन के हितों की अनदेखी न हो। रूस और यूक्रेन का युद्ध रोकने के लिए अमेरिका समेत कई देश प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में बीते दिनों अलास्का में रूसी राष्ट्राध्यक्ष पुतिन और ट्रंप की बैठक हुई। अब यूक्रेन के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में यूरोपीय नेता भी शामिल होंगे। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में प्रस्तावित इस बैठक के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ कई यूरोपीय नेता शामिल होंगे। इस बैठक को लेकर यूरोपीय नेताओं की सक्रियता का एक कारण फरवरी में व्हाइट हाउस में हुई जेलेंस्की और ट्रंप की विवादास्पद मुलाकात भी है। उस समय हुई बातचीत ने तनावपूर्ण माहौल पैदा किया था। अब यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी से उम्मीद है कि यूक्रेन पर किसी तरह का दबाव न बने और शांति समझौते की दिशा में पारदर्शिता बनी रहे।
शांति समझौते की चिंता और यूरोप की भूमिका
ट्रंप पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि वे रूस के साथ शांति समझौते की मध्यस्थता करना चाहते हैं। लेकिन यूरोपीय देशों को आशंका है कि कहीं इस प्रक्रिया में यूक्रेन के हितों को नजरअंदाज न किया जाए। यही कारण है कि यूरोप के बड़े नेता खुद इस बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं ताकि यूरोपीय आवाज भी स्पष्ट रूप से सुनी जा सके।
यूरोपीय नेताओं का बड़ा दल व्हाइट हाउस पहुंचेगा
यूरोपीय आयोग की प्रमुख वॉन डेर लेयेन के साथ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और नाटो के महासचिव मार्क रुटे भी इस बैठक में शामिल होंगे। इतनी बड़ी संख्या में यूरोपीय नेताओं का व्हाइट हाउस जाना इस बात को दर्शाता है कि यूरोप यूक्रेन मुद्दे पर किसी भी समझौते में अपनी अहम भूमिका बनाए रखना चाहता है।
रूस से ट्रंप की मुलाकात के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ शिखर वार्ता की थी, जिसमें जेलेंस्की को आमंत्रित नहीं किया गया था। इस वजह से यूरोप और यूक्रेन दोनों में चिंता बढ़ गई है कि कहीं अमेरिका एकतरफा शांति सौदा करने की कोशिश न करे। अब यूरोपीय नेताओं की संयुक्त मौजूदगी इस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है कि यूक्रेन को किसी भी तरह से कमजोर स्थिति में न डाला जाए।

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