यूपी

बिजली निजीकरण मामले में बाबा साहब का अनुसरण करें सरकार

टोरेंट पावर व नोएडा पावर कंपनी की सीएजी हो तो निगलेगा बड़ा घोटाला

लखनऊ। उपभोक्ता परिषद ने सरकार को बिजली निजीकरण मामले में बाबा साहेब आम्बेडकर की बॉतों पर अनुसरण करने की मांग की है। उन्होंनें टोरेंट और नोएडा पावर के मामले में कहा कि पूरे वैधानिक रूप से अगर इन दोनों कम्पनियों की सीएजी जॉच कराई जाए तो महाघोटला सामने आएगा।प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण पर पिछले 10 महीने से चले आ रहे विवाद के बाद उपभोक्ता परिषद ने जनहित में उत्तर प्रदेश सरकार से 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर मांग उठाई है कि अब सरकार निजीकरण के फैसले को निरस्त करते हुए संविधान निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा 1934 में कहे गए विचार पर अमल करना चाहिए। जिस पर बाबा साहब ने कहा था बिजली जैसी आवश्यक सेवाएं हमेशा सरकारी क्षेत्र में रहना चाहिए। बिजली सस्ती नहीं बहुत सस्ती होनी चाहिए। ऐसे में अब समय आ गया है जब उत्तर प्रदेश सरकार को पूर्णतया यह ऐलान कर देना चाहिए कि बिजली को सरकारी क्षेत्र में सख्ती के साथ सुधार की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह मांग उठाई की उत्तर प्रदेश के निजी क्षेत्र के दोनों प्रयोग टोरेंट पावर व नोएडा पावर कंपनी के सभी खरीद फरोख्त हुआ वह वित्तीय पैरामीटर की सीएजी से जांच कर ली जाए तो बड़ा मामला सामने आएगा। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा बिजली जैसी आवश्यक सेवाएं निजी क्षेत्र में जाने से देश के गरीब किसान व आम उपभोक्ता ठगे जाएंगे आज टोरेंट पावर आगरा में किस प्रकार से एस्टीमेट में धांधली की जा रही है कोई देखने वाला नहीं है। इस प्रकार से नोएडा पावर कंपनी में चाहै वह ट्रांसफार्मर खरीद हो या अन्य सामग्री की खरीद हो उसमें बड़े पैमाने पर घोटाले किए जा रहे हैं। कमीशन के नाम पर खुला खेल चल रहा है। आज भी दोनों बिजली कंपनियों में सीएजी जांच कर ली जाए तो स्वतः खुलासा हो जाएगा कि वहां के भ्रष्टाचार की सीमा कहां तक पहुंच गई है।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा निजी क्षेत्र वास्तव में नियंत्रक महालेखा परीक्षक की जांच से क्यों भागते हैं सभी निजी घराने चाहते हैं कि उनके द्वारा स्वयं का नियुक्त ऑडिटर उनकी जांच करें। ऐसे मे यह कैसे संभव है कि उनका ऑडिटर उनकी कमियां निकलेगा।ऐसे में बेहतर यही होगा कि आज भी उत्तर प्रदेश सरकार केवल यह ऐलान कर दे की निजी क्षेत्र में कैग की ऑडिट अनिवार्य होगी। फिर देख ले कि एक भी निजी घराना उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र में आने आने से कोसों दूर भागेगा।

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