माँ को अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब: मुसंडी गांव में भीगी पलकों से दी श्रद्धांजलि, समाजसेवी रज्जन यादव ने बंधाया ढाढ़स!
यूपी से महाराष्ट्र तक लाखों लोगों ने दी अंतिम विदाई!
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद की 167 विधानसभा क्षेत्र पुरवा के अंतर्गत विकासखंड हिलौली के मुसंडी गांव में शनिवार का दिन अत्यंत शोकाकुल माहौल लेकर आया। गांव के गौरव और मुंबई के प्रख्यात व्यवसायी मुन्ना सावरी की माता जी का शनिवार को मुंबई में निधन हो गया। जैसे ही ये दुःखद समाचार गांव में पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।यूपी से लगायत महाराष्ट्र तक लाखों लोगों ने ममतामई मां को दी अंतिम विदाई।
रविवार की सुबह मुंबई से फ्लाइट द्वारा उनका पार्थिव शरीर मुसंडी लाया गया। गांव पहुंचते ही लाखों की संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। पूरा माहौल भावविभोर हो उठा। हर आंख नम थी, हर चेहरा ग़मगीन। लोगों ने भीगी पलकों से मां को अंतिम विदाई दी।
इस मौके पर प्रमुख समाजसेवी रज्जन सिंह यादव भी पहुंचे और शोकाकुल परिवार को ढाढ़स बंधाया। उनके साथ मौजूद थे एंटी करप्शन न्यूज़ एंड व्यूज़ के संपादक विनोद दीक्षित, जिन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिजनों को इस कठिन घड़ी में ईश्वर से संबल प्रदान करने की कामना की।
रज्जन यादव ने कहा कि, “माँ केवल जन्म देने वाली नहीं होती, वह जीवन को दिशा देने वाली शक्ति होती है। आज एक मां का जाना केवल एक परिवार का दुख नहीं, पूरे गांव की अपूरणीय क्षति है।”
अपने सहज, सहयोगी स्वभाव के लिए जाने जाने वाले रज्जन यादव गांव के ही डॉ. सहबुद्दीन सिद्दीकी के घर भी पहुंचे, जिनका सोमवार को सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया था। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मिलकर सांत्वना दी और कहा, “हम इस दुख की घड़ी में आपके साथ हैं, सेवा में जो भी बन पड़ेगा, हम तत्पर रहेंगे।”
गौरतलब है कि मुन्ना सावरी मुंबई के एक सफल और सम्मानित व्यवसायी हैं। उनके होटल और रेस्टोरेंट्स देश-विदेश में फैले हुए हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा। उनका गांव से जुड़ाव आज भी उतना ही गहरा है, जितना पहले था। यही वजह है कि मां के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देने वे अपने पैतृक गांव लाए, जहां मां की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा इस दौरान जहां धर्म और मानवीय संवेदना की गूंज सुनाई दी। हर किसी की आंखों में एक ही भाव था “माँ तुझे सलाम।”
समाजसेवी रज्जन सिंह यादव का गांव में जनसेवा का भाव देखकर एक बार फिर लोगों ने उन्हें दुआओं से नवाजा। गरीब, अमीर, हर जाति, हर वर्ग का व्यक्ति उन्हें अपने सुख-दुख में साथ खड़ा पाता है। यही कारण है कि रज्जन यादव सिर्फ एक नाम नहीं, एक विश्वास बन चुके हैं।
आज मुसंडी गांव की हवाओं में एक शोक की उदासी थी, पर साथ ही एक गौरव का भाव भी — कि इस गांव ने ऐसी महान आत्माओं को जन्म दिया, जिन्होंने पूरे देश और समाज में अपना नाम रोशन किया।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति प्रदान करें — यही सामूहिक प्रार्थना थी पूरे गांव की।

