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अवैध खनन पर योगी सरकार सख्त: 21 हजार से अधिक वाहनों को किया ब्लैक लिस्टेड, AI-ड्रोन से कसी नकेल

✍️आर.एस.तिवारी

लखनऊ/अवैध खनन पर नकेल कसने के लिए योगी सरकार ने हाईटेक तकनीक का सहारा लिया है. अब खनन क्षेत्र में आंखों से नहीं बल्कि AI, ड्रोन और सैटेलाइट की निगरानी से हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है. प्रदेश में अब तक 21,477 अवैध खनन और ओवरलोडिंग में लगे वाहनों को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है.
खनन विभाग ने पूरे प्रदेश में 57 जगह AI और IoT आधारित चेकगेट्स लगाए हैं. ये चेकगेट्स वाहनों की गतिविधियों पर निगरानी रखते हैं और वेट-इन-मोशन तकनीक से यह पता लगाते हैं कि कौन सा वाहन ओवरलोड है. इस कार्रवाई में परिवहन विभाग भी सहयोग कर रहा है.
खनन क्षेत्र में लगे वाहनों पर अब AIS140 जीपीएस डिवाइस लगाए जा रहे है. ये डिवाइस रियल टाइम में वाहन की लोकेशन बताते हैं और तय रूट से हटने पर तुरंत अलर्ट भेजते हैं. इसके साथ ही MIS रिपोर्ट के जरिए विभाग लगातार नजर रखता है कि कोई वाहन नियम तो नहीं तोड़ रहा.
ड्रोन तकनीक का भी बड़ा रोल है. ड्रोन से खनन क्षेत्र की लंबाई चौड़ाई और गहराई की माप ली जा रही है. इससे यह आसानी से पता लगाया जा रहा है कि तय सीमा से ज्यादा खनन तो नहीं हो रहा. ड्रोन से वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस किया जाता है यानी कितनी मिट्टी रेत या पत्थर निकाला गया इसका सटीक अंदाजा लगाकर कार्रवाई की जा सके.
खनन विभाग की PGRES लैब लगातार सैटेलाइट डेटा (जैसे LISS-IV, गूगल अर्थ और Arc-GIS) के जरिए पूरे प्रदेश में खनन की गतिविधियों पर नजर रख रही है. इससे न सिर्फ अवैध खनन की पहचान हो रही है बल्कि नए खनिज क्षेत्रों की भी खोज की जा रही है. योगी सरकार ने अब खनिज ले जाने वाले वाहनों के मालिकों यानी ट्रांसपोर्टरों को भी हितधारक मानते हुए उनका पंजीकरण शुरू किया है. इससे हर स्तर पर जवाबदेही तय हो रही है.
अवैध खनन न सिर्फ सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाता है बल्कि इससे पर्यावरण को भी गंभीर खतरा होता है. खुलेआम रेत और पत्थरों की खुदाई से नदियां कटती हैं जलस्तर गिरता है और भूमि बंजर हो जाती है. ऐसे में सरकार की यह तकनीकी और सख्त पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम है.

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