मऊ उपचुनावः सुभासपा-भाजपा गठबंधन और सपा में होगी जंग

लखनऊ : माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे व विधायक अब्बास अंसारी को दो साल की सजा मिलने के बाद विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई है। अब मऊ सदर सीट पर उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस सीट को लेकर सुभासपा-भाजपा गठबंधन, अंसारी परिवार और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी घमासान शुरू हो चुका है।सुभासपा अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी मऊ से उपचुनाव लड़ेगी। अब्बास अंसारी हमारी पार्टी से विधायक रहे हैं, यह सीट हमारी पारंपरिक रही है। भाजपा के साथ गठबंधन होने के चलते हमने अपनी बात शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा दी है। भाजपा हमारा समर्थन करती है तो हम जीतेंगे। अंसारी परिवार मऊ की परंपरागत सीट हाथ से नहीं जाने देना चाहता। अब्बास अंसारी ने संकेत दिए हैं कि उनकी जगह उनके छोटे भाई उमर अंसारी या चाचा अफजाल अंसारी की बेटी नुसरत अंसारी को मैदान में उतारा जा सकता है। अंसारी परिवार को सहानुभूति की लहर काभरोसा है। मुख्तार अंसारी की जेल में मौत के बाद से हालात बदल गए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अब्बास अंसारी की विधायकी जानबूझकर खत्म की गई। उन्होंनेकार्यकर्ताओं को मऊ उपचुनाव के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने दावा किया कि अंसारी परिवार का ही कोई सपा के टिकट पर चुनाव लड़ेगा और विजयी होगा। अब्बास अंसारी और अफजाल अंसारी कानूनी राहत की उम्मीद में हैं। अफजाल अंसारी ने बताया कि कोर्ट में सुनवाई जारी है, इसलिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जा सकती। अब्बास अंसारी को मिली दो साल की सजा के खिलाफ बड़ी अदालत में अपील की जाएगी। पिछले 35 वर्षों से मऊ विधानसभा सीट पर अंसारी परिवार का दबदबा रहा है। यह सीट मुख्तार अंसारी के नाम से जानी जाती रही है। अब उनके निधन के बाद अंसारी परिवार को सहानुभूति भी मिल रही है, लेकिन साथ ही इस बार मुकाबला और भी कठिन होता दिख रहा है। प्रदेश के कई बड़े चेहरे वाराणसी के पूर्व एमएलसी और पूर्व मुख्य सचिव तक इस सीट से उपचुनाव लड़ने की जुगाड़ में हैं।



