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लखनऊ पहुंचा हाजियों का पहला जत्था,40 दिन बाद घर पहुंचे तो आंखें नम हुईं

40 दिनों की हज यात्रा पूरी करके हाजी अपने वतन पहुंच गए। परिवार वालों ने मिठाई खिलाकर और फूल-माला पहनकर उनका स्वागत किया। सऊदी अरब से हज के अरकान पूरे करने के बाद 288 हाजियों का जत्था 12 और 13 जून की रात लखनऊ पहुंचा। चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाजियों का स्वागत किया गया। वतन वापसी आते ही हाजी अपने परिजनों को देखकर गले लगा लिया। परिवार वालों से मिलकर हाजियों की आंखों से आंसू बहने लगे। हाजियों को लेकर 12 और 13 जून की देर रात फ्लाइट एयरपोर्ट पहुंची। राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी तमाम सदस्यों के साथ मौजूद थे। दानिश आजाद ने हज कमेटी के सचिव एसपी तिवारी और अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर हाजियों को फूल देकर उनका स्वागत किया। हज अध्यक्ष ने हाजियों से बातचीत करते हुए हज के दौरान मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी हासिल की। मंत्री दानिश आजाद ने कहा कि हज का पाक सफर मुकम्मल करके हमारे हाजी वापस लौटे। पहली फ्लाइट से आने वाले तमाम हाजियों का स्वागत करने के लिए हम लोग मौजूद रहे। हाजियों से बात करने के बाद हम लोगों को भी यह संतुष्टि हुई कि सभी हाजी हज कमेटी की तमाम सुविधाओं से खुश थे। यह हमारे सरकार और हज कमेटी के लिए सफलता है कि यह सफर पूरी तरीके से कामयाब रहा। हाजियों ने हज के दौरान मुल्क की तरक्की के लिए दुआ किया इसके लिए हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं। हज यात्री अल्लाह का मेहमान होता है इसलिए हमारी कोशिश होती है कि हम इन्हें बेहतर से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराएं। दानिश आजाद ने बताया कि हज सेवक जो इस वर्ष हज इंस्पेक्टर के रूप में हाजियों की मदद कर रहे थे। मक्के और मदीने में भीषण गर्मी में उन्होंने लोगों की पूरी सहायता किया। हज इंस्पेक्टर की मदद से हाजियों को हज के अरकान अदा करने में बहुत सहूलत मिली। हज के बीच में हमने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। हाजियों की समस्याओं के समाधान के लिए हमने क्यूआरटी बनाई थी जिसकी मदद से तत्काल समस्या का समाधान करते थे। हज यात्रा से लौटे मोहम्मद अहमद ने कहा कि यह बहुत ही खुशी की बात है हज पूरा करके अपने वतन वापस लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि मक्के के अंदर अपने वतन हिंदुस्तान की तरक्की और अमन शांति के लिए दुआ मांगी। साथ ही उन्होंने कहा कि हाजियों की संख्या बहुत ज्यादा होती है इसलिए थोड़ी बहुत समस्या हो जाती है। बाकी भारत सरकार और सऊदी गवर्नमेंट की व्यवस्थाएं ठीक रही। एहराम (हज में पहनने वाला विशेष वस्त्र) के बाद ऐसा लगा कि दशकों का ख्वाब पूरा हो गया। हज यात्रा से वापस लौटे मोहम्मद अनीस ने कहा कि जब पहली बार काबा पर नजर पड़ी तो दुनिया भूल गए। 40 दिन में आसानी के साथ सब अरकान अदा हो गए। गर्मी बहुत भीषण थी। लाखों की संख्या में लोग थे इसलिए अकसर हाजी रास्ता भूल जाते थे। सुरक्षा कर्मियों और हज सेवकों की सहायता से ज्यादा परेशानी नहीं होती थी। लोगों को यह प्रयास करना चाहिए कि बुजुर्गों को अकेले हज पर ना भेजें क्योंकि वहां पर हाजियों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सभी लोग जितनी जल्दी हो सके हज कर लें, बुढ़ापे तक इंतजार न करें।

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