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हमें हिंदी को लेकर सख्ती मंजूर नहीं, राज ठाकरे के प्रदर्शन के बाद शिवसेना-यूबीटी ने सरकार के फैसले का किया विरोध

मुंबई

महाराष्ट्र में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने के बाद राजनीतिक घमासान मचा है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ता सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर चुके हैं। अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी विरोध शुरू कर दिया है। शिवसेना-यूबीटी के नेता अरविंद सावंत ने कहा कि हमें किसी भी प्रकार से हिंदी को लेकर सख्ती मंजूर नहीं है। हिंदी भाषा पर विवाद के बीच अरविंद सावंत ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, हिंदी भाषा को लेकर राज ठाकरे ने प्रदर्शन किया, ये बात मानता हूं। खुद उद्धव ठाकरे ने हिंदी भाषा को लेकर अपनी भूमिका स्पष्ट की है। हमें किसी भी प्रकार से हिंदी को लेकर सख्ती मंजूर नहीं है।
उन्होंने कहा, मैं मराठी मीडियम स्कूल से पढ़ा हूं, लेकिन हिंदी में बात कर रहा हूं। किसी भाषा को लेकर द्वेष नहीं है। सख्ती को लेकर दिक्कत है। आप बच्चों को हिंदी पढ़ाइए, लेकिन हिंदी पांचवीं कक्षा के बाद अनिवार्य कीजिए। अरविंद सावंत ने सवाल पूछा कि पहले से पांचवीं कक्षा के बच्चों के लिए हिंदी क्यों लाना चाहते हैं? गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में तीसरी भाषा कौन सी होगी, ये सरकार को बताना होगा। शिवसेना के 59वें स्थापना दिवस पर भी अरविंद सावंत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, खुश हूं, लेकिन थोड़ा दुख इस बात को लेकर है कि शिवसेना टूटी। हालांकि सावंत ने कहा, शिवसेना एक ही है और मैं उसका गवाह हूं। बालासाहेब ठाकरे ने न जाने कितने साधारण लोगों को असाधारण बनाया। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर अरविंद सावंत ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, अगर दो भाई मिल जाते हैं तो खुशी होगी। आज हम सुन रहे हैं कि दोनों साथ आ सकते हैं। जब सही में एक साथ आएंगे तो उस समय ज्यादा खुशी होगी। दोनों भाइयों के साथ आने से महाराष्ट्र में एक नया इतिहास बनेगा।

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