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“दिल्ली अदालत से दुष्कर्म के आरोपी को जमानत, कहा– महिला ने FIR में कुछ तथ्य छुपाए

दिल्ली की एक अदालत ने दुष्कर्म के आरोपी को जमानत दे दी है, यह कहते हुए कि महिला ने अपनी प्राथमिकी में कुछ तथ्य छुपाए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि जांच में सहयोग की पेशकश की गई थी।

 अदालत का आदेश

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कथित अपराध की शिकायत दर्ज कराने में तत्परता नहीं दिखाई और मामले में आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं थी। अदालत ने आरोपी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बॉन्ड पर जमानत दी।

 मामला क्या था?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने 2016 में जसोला विहार स्थित अपने कार्यालय में 32 वर्षीय एक तलाकशुदा महिला के साथ कथित बलात्कार किया और घटना के कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए। आरोपी महिला को शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध भी बना रहा था।

हालांकि, शिकायतकर्ता ने 2016 में कथित तौर पर किए गए अपराध के लिए 2024 में पहली बार पुलिस से संपर्क किया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के रिश्तेदार भी राष्ट्रीय राजधानी में रहते हैं और ऐसी कोई भी वजह नहीं है, जिसने उसे पुलिस या अपने रिश्तेदारों से “समय पर” कथित अपराध की शिकायत करने से “रोका” हो।

अदालत ने कहा कि यह ऐसा मामला प्रतीत नहीं होता है, जिसमें गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ की जरूरत है। आरोपी जांच में शामिल होने के लिए तैयार और इच्छुक है। अदालत ने यह भी कहा कि महिलाओं को दिए गए विशेषाधिकारों का इस्तेमाल व्यक्तिगत बदला लेने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता के खिलाफ उपयुक्त कानूनी कार्रवाई शुरू करे क्योंकि उसने गुस्से और नशे की हालत में पुलिस में झूठी शिकायत की, जिसके कारण आरोपी को लगभग 10 दिन तक जेल में रहना पड़ा।

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