दहेज हत्या केस.आरोपी बोलाए ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थाए
सुप्रीम कोर्ट ने कहाए इससे घर पर अत्याचार करने की आजादी नहीं मिल जाती

नयी दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दहेज हत्या के आरोपी को पुलिस के सामने सरेंडर से छूट देने से इनकार कर दिया। आरोपी ने कोर्ट के सामने दलील दी थी कि वो ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा था। आरोपी ने कहा मैं 20 साल से ब्लैककैट कमांडो हूं। राष्ट्रीय राइफल्स में पोस्टिंग है। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने कहाए आप ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थेए इससे आपको घर पर अत्याचार करने की आजादी नहीं मिल जाती है। आप देखिए कि फिजिकली कितने फिट हैंए ये दिखा रहा है कि आपने अपनी पत्नी का गला घोंट दिया होए उसे मार डाला हो। मामला 2002 का हैए आरोपी बलजिंदर सिंह पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा। इस बात की गवाही मृतक के भाई और उसकी पत्नी ने दी। भाई ने पुलिस को बताया किए 18 जुलाई 2002 को सुबह 9ण्00 बजे वे बहन के ससुराल पहुंचेए तो उन्होंने देखा कि उसके पति ;आरोपीद्ध और ससुर ने कपड़े से बहू का गला घोंट दिया। इस दौरान सास और ननद ने उसके हाथ.पैर पकड़े हुए थे। यह हादसा देखकर भाई ने शोर मचाया तो सभी आरोपी भाग गए। लेकिन तब तक उसकी बहन की मौत हो गई थी। निचली अदालत ने आरोपी परिवार के चारों सदस्यों को बरी कर दिया थाए लेकिन पति को दोषी ठहराया। जुलाई 2004 मेंए अमृतसर की एक ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता बलजिंदर सिंह को शादी के दो साल के भीतर अपनी पत्नी की मौत के लिए धारा 304.बी आईपीसी के तहत दोषी ठहराया।
निचली अदालत ने आरोपी बलजिंदर सिंह को 10 साल की सजा सुनाई। इस दौरान उसने हाईकोर्ट में अपील की। करीब 20 साल तक हाईकोर्ट में केस चला। बीच में तीन साल बाद आरोपी को जेल से बाहर आने की परमीशन मिल गई थी इसी साल मई में हाईकोर्ट का फैसला आयाए कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा। जिसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।



