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बेटी जन्मी तो ससुरालियों ने बना दी नारकीय जिंदगी… कब थमेगा दहेज का यह कलयुगी कहर?

(मो0 अहमद चुनई की खास रिपोर्ट)

देश में जहां बेटियां देवी मानी जाती हैं, वहीं एक दो माह की मासूम बच्ची की मां को इसलिए दोजख में झोंका जा रहा है क्योंकि उसने दहेज नहीं लाया… और बेटी को जन्म दे दिया। यह दर्दनाक मामला यूपी की उन्नाव के मौरावां थाना क्षेत्र के ग्राम भवानीपुर मजरे अकोहरी का है, जहां विवाहिता चांदनी की जिंदगी हर दिन किसी कालखंड से गुजर रही है।

चांदनी की शादी तीन वर्ष पूर्व हिंदू रीति-रिवाजों से विकास नामक युवक से हुई थी। परन्तु शादी के महज तीन दिन बाद से ही उसके सपनों की दुनिया खंडहर में तब्दील हो गई। उसके पति, सास, ससुर, देवर और ननद ने उसे दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक यातनाएं देनी शुरू कर दीं। आरोप है कि एक लाख रुपये नकद और सोने की चेन की मांग रखी गई, और जब चांदनी के पिता ने अपनी आर्थिक विवशता जताई, तो ननद ने पेट्रोल डालकर फूंक देने की धमकी दे डाली।

हालात तब और भयावह हो गए जब पीड़िता को घर में बंद कर बेरहमी से पीटा जाने लगा। उसका पति बाहर शहर में रहते हुए भी फोन पर कहता – “अगर दहेज नहीं लाई तो तुझे जिंदा जला दूंगा।” पीड़िता ने बताया कि उसका ससुर तक उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करता, छेड़छाड़ करता और कमरे में खींच ले जाकर अश्लील हरकतें करता। विरोध करने पर उसे मारा-पीटा जाता और घर से निकाल देने की धमकियां दी जातीं।

एक औरत के लिए मां बनना सबसे सुखद पल होता है, लेकिन चांदनी के लिए वही पल त्रासदी बन गया। जैसे ही उसने बेटी को जन्म दिया, घरवालों का रवैया और भी क्रूर हो गया। दो माह की मासूम बच्ची के साथ जीना दुश्वार हो गया। उसे जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं, गहने छीन लिए गए, और खाना मांगने पर मौत की धमकी दी जाती है।

पीड़िता ने थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस ने जांच कर कार्रवाई का भरोसा जरूर दिया है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक चुपचाप सहती रहेंगी बेटियां? कब तक ससुराल के नाम पर उन्हें अपमान, हिंसा और आग में झोंका जाएगा?

यह सिर्फ एक चांदनी की कहानी नहीं, यह उन हजारों बहुओं की कहानी है जिन्हें आज भी बेटी का दर्जा नहीं मिला। जिनकी कोख से बेटी जन्मी, लेकिन ससुराल वालों के लिए वह एक अपराध बन गया। अब समाज और कानून को मिलकर यह तय करना होगा कि आखिर कब थमेगा दहेज का यह कलयुगी कहर?

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