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मौत की मंडी: जब सांप के काटने से नहीं, सरकार को काटने से हुआ करोड़ों का मुनाफा! MP में जिंदा लोग 280 बार मरे, खाते में आई 11 करोड़ की राहत धनराशि!

देश के मध्य प्रदेश की सिवनी जिले से आई ये खबर किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं, जहां सांप सिर्फ इंसान को नहीं, सरकारी खजाने को भी डंसता है – और बार-बार। यहां 47 लोगों को 280 बार मृत दिखाया गया, वो भी एक जैसे कारण से – सर्पदंश। हर बार शासन ने मृतक के नाम पर 4 लाख रुपये की राहत राशि दी, जो सीधी ठगों की जेब में गई। कुल मिलाकर 11 करोड़ 26 लाख रुपए का महाघोटाला सरकारी आँखों के सामने होता रहा, और सिस्टम सोता रहा।

सबसे चौंकाने वाली मिसाल रानी बाई की है, जो सरकारी कागजों में 29 बार सांप के काटने से मरी और हर बार 4 लाख की राशि ‘उसे’ मिलती रही। यानी एक ही महिला की ‘29 मौतें’, और कुल रकम 1 करोड़ 16 लाख रुपए! वहीं, एक अन्य युवक राजू 28 बार मरा, और 1 करोड़ से अधिक रकम उसके नाम पर निकाली गई। यह कोई गलती नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ रची गई ठगी की स्कीम थी।

2019 से 2022 के बीच का यह खेल नवंबर 2022 में राजस्व विभाग की ऑडिट में पकड़ा गया। जांच के दौरान सामने आया कि केवलारी तहसील के क्लर्क सचिन दहायत ने 279 मौतें दर्ज कीं—सांप का काटना, पानी में डूबना, आकाशीय बिजली से मरना—और हर एक के नाम पर 4 लाख की राशि स्वीकृत करवाई। लेकिन जिन खातों में पैसे गए, वे सचिन के रिश्तेदार और जान-पहचान वाले थे। दस्तावेज, लेटरपैड, सील और हस्ताक्षर सब नकली निकले।

कोष एवं लेखा विभाग के जांच अधिकारी रोहित सिंह कौशल ने बताया कि संबंधित कर्मचारियों के लॉगिन और पासवर्ड से ये भुगतान हुए हैं, इसलिए उनके खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सवाल सिर्फ घोटाले का नहीं, बल्कि इस पर मौन और अंधे बने सिस्टम का है।

अब तक 37 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, जिनमें 21 गिरफ्तार किए जा चुके हैं, लेकिन इस घोटाले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या अब हमें ये भी साबित करना होगा कि हम जिंदा हैं?

यह कोई साधारण भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि उस भरोसे की हत्या है, जो एक गरीब सरकारी मदद पर करता है। जब मौत को ही व्यापार बना दिया जाए, तो इंसानियत कितनी जिंदा रह जाती है? सिवनी की गलियों में आज भी रानी बाई और राजू शायद मुस्करा रहे होंगे—”हम तो जिंदा हैं, मगर हमारी मौतों से कुछ लोग अमीर हो गए।”

अब देखना ये है कि इस खेल का ‘सांप’ कौन है और उसे दूध पिलाने वाले कौन-कौन से सिस्टम के छेदों में छिपे हैं। ये सिर्फ सजा का मामला नहीं, सिस्टम की सफाई का वक्त है। देखते रहिये ACN चैनल पर शीतल निर्भीक की ऐसे ही खास खबरें।

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