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धर्म की रक्षा से न्याय के रण तक: सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह बनीं क्षत्रिय परंपरा की प्रतीक, कुलदेवी मंदिर से लेकर कृष्ण जन्मभूमि मुकदमे तक निभा रहीं धर्म-राष्ट्र का दायित्व

नई दिल्ली।“क्षत्रिय धर्म केवल तलवार चलाने का नाम नहीं, यह धर्म, संत, गौमाता और मातृभूमि की रक्षा का संकल्प है। यह कहना है सुप्रीम कोर्ट की जानी-मानी अधिवक्ता रीना एन सिंह का, जो न केवल न्यायालय में हिंदू धार्मिक मामलों की मुखर पक्षकार हैं, बल्कि अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों को भी उसी निष्ठा से निभा रही हैं।

हरियाणा के एक प्रतिष्ठित क्षत्रिय परिवार में जन्मीं रीना एन सिंह की शादी बिहार के बांका जिले के कक्षवाह वंश में हुई। उन्होंने अपने ससुराल में कुलदेवी जमवाय माता के पहले मंदिर का निर्माण करवाकर ना केवल एक ऐतिहासिक पहल की, बल्कि अपने वंश और संस्कृति के प्रति गहरी आस्था का परिचय भी दिया।

रीना एन सिंह वर्तमान में भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा मामले में हिंदुओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रख रही हैं। उनका कहना है कि आधुनिक लोकतांत्रिक युग में युद्ध अब तलवारों से नहीं, बल्कि संविधान और न्याय की भूमि पर लड़े जाते हैं। धर्म और सत्य के लिए न्याय का रास्ता ही क्षत्रिय का आधुनिक शस्त्र है।

राष्ट्रीय मुद्दों पर प्रखरता से अपनी राय रखने वाली रीना एन सिंह की पुस्तक “योगी आदित्यनाथ: लोक कल्याण के पथ पर” न केवल राजनीतिक और धार्मिक जगत में चर्चित रही है, बल्कि इसे कई मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और धार्मिक संस्थानों से सराहना प्राप्त हुई है। इस पुस्तक में उन्होंने योगी आदित्यनाथ और नाथ संप्रदाय के योगदान को विस्तार से लिखा है।

गाय को “राष्ट्र जननी” घोषित करने की माँग को लेकर भी वह कई मंचों से आवाज़ उठा चुकी हैं। उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया है कि गौमाता की रक्षा करना, संतों का सम्मान करना और धर्म की मर्यादा बनाए रखना ही सच्चे क्षत्रिय धर्म की पहचान है।

हाल ही में एक क्षत्रिय सम्मेलन में उनके वक्तव्य की व्यापक चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने कहा था – “जब क्षत्रिय मजबूत होगा तभी देश मजबूत होगा।” यह वक्तव्य न केवल क्षत्रिय समाज के बीच गर्व का विषय बना, बल्कि राष्ट्रवाद की भावना को भी प्रबल करता है।

रीना एन सिंह की सोच, उनके कार्य और उनके संघर्ष यह प्रमाणित करते हैं कि आज भी कोई महिला यदि दृढ़ निश्चयी हो, तो वह न्याय, धर्म और राष्ट्र के क्षेत्र में मिसाल बन सकती है। वे सुप्रीम कोर्ट में न्याय के लिए, और समाज में धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए, दोनों मोर्चों पर डटी हुई हैं।

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